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जाने, भारत का उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है ?

जाने, भारत का उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है?

जाने, भारत का उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है ?
उपराष्ट्रपति देश का  दूसरा सबसे उच्च सांविधानिक अधिकारी होता है।  उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में मृत्यु, त्यागपत्र, महाभियोग या अन्य स्थितियों के कारण राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।

उपराष्ट्रपति पद पर आवेदन करने के लिए 3 शर्ते है :
  1. भारत का नागरिक हो। 
  2. 35 वर्ष की आयु पूरी कर चूका हो।  
  3. राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए पात्र हो।  
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए उपराष्ट्रपति का निर्वाचन कर लिया जाता है।  भारत का चुनाव आयोग उपराष्ट्रपति के पद के लिए चुनाव कराता है।  

उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति ( propostional representation) से किया जाता है।  

इसमें मतदान बहुत ही खास तरीके से किया जाता है।  जिसे एकल हस्तांतरणीय वोट (Single transferable Vote) भी कहा जाता है। 

इसमें मतदाता को केवल एक ही वोट देना होता है , परन्तु उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है।  मतदाता बैलेट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पसंद को 1 , दूसरी को 2 , और इस तरह आगे प्राथमिकता देता जाता है।  

नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कार्यकारी उपराष्ट्रपति के पदावधि की समाप्ति के 60 दिनों के अंदर किया जाना होता है।  

इसके लिए चुनाव आयोग एक चुनाव अधिकारी नियुक्त करता है जो आमतौर पर किसी एक संसद सदन का सेक्रेटरी जनरल होता है।  चुनाव अधिकारी चुनाव को  लेकर पब्लिक सूचना जारी करता है।  और उम्मीदवारों से नामांकन डलवाता है।  

उपराष्ट्रपति के लिए निर्वाचन चाहने वालो उम्मीदवारों को 15000 रूपये की जमानत राशि जमा करनी होती है। उम्मीदवारों की ओर से दायर नामांकन पत्रों की संख्या चाहे कितनी भी हो , उसे सिर्फ यही राशि जमा करनी  होती है।  चुनाव अधिकारी नामांकन पत्रों की जाँच करता है और योग्य उम्मीदवारों का नाम बैलेट पेपर में शामिल करता है।  

चुनाव हो जाने के बाद सबसे पहले यह देखा जाता है की सभी उम्म्मीद्वारो को पेहली प्राथमिकता वाले वोट कितने मिले है।  फिर सभी को मिले पहली प्राथमिकता वाले वोटो को जोड़ा जाता है.  कुल संख्या को 2 से भाग किया जाता है एवं भागफल में 1 जोड़ दिया जाता है।  अब जो संख्या मिलती है उसे वह कोटा माना  जाता है जो किसी उम्मीदवार को काउंटिंग में बने रहने के लिए जरूरी है।  

अगर पहली गिनती में  उम्मीदवार जीत के लिए जरुरी कोटे के बराबर या उसे ज्यादा वोट हासिल कर लेता है तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है।  अगर ऐसा न हो पाए तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।  

उम्मीदवार के विजयी होने के बाद पद ग्रहण करने से पहले उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के सामने या राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त  व्यक्ति के सामने शपथ लेनी पड़ती है. उपराष्ट्रपति अपने पद से इस्तीफा देना चाहे तो उसे राष्ट्रपति के पास अपना इस्तीफा भेजना होता है।  राष्ट्रपति के स्वीकार किये जाने के बाद ही इस्तीफे को माना  जायेगा।

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